दिसंबर 12, 2010

इंग्लैंड का छात्र आन्दोलन : भूमंडलीकरण के विरुद्ध बगावत ............................



उदारीकरण के विरुद्ध दुनियाभर में छात्र -आन्दोलन आग की तरह फैलता जा रहा है /फ़्रांस के विद्यार्थीयो द्वारा लीड लेने के बाद इटली और अब इंग्लैंड में फीस वृद्धि और शिक्षा के बाजारीकरण के विरोध में छात्र आन्दोलन उग्र रूप धारण कर चुका है,दरअसल वर्ल्ड-बैंक ,आई .ऍम .एफ़ के दबाव में  सरकारें शिक्षा को जन्कल्यानकारी-एजंडे से मुक्त कर बाजार की ताकतों के हवाले कर रहीं है , जिसकी मार गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रही है/शिक्षा पर बजट लगातार घटाने से फीसें बढ़ रही हैं ,जिससे युवाओं में पैदा हूई बैचैनी एक नए वैश्विक युवा आन्दोलन की पृष्ठभूमि को जन्म दे  रही है / इंग्लैंड की सरकार ने संसद में बिल लाकर कालेजों की टयूशन-फीस को तीन गुना बढ़ाकर ३००० पाउंड वार्षिक से ९००० पाउंड कर दिया है/शिक्षा पर हुए इस हमले के विरोध में उग्र विद्यार्थीयो ने प्रिंस-चार्ल्स तक की गाड़ी पर पत्थरों से हमला कर दिया / संसद पर प्रर्दर्शन के दोरान आगजनी, तोड़फोड़ की घटनाओं में ५० प्रर्दर्शन कारी घायल हुए हैं/पूरे इंग्लैंड  में छात्र आन्दोलन उग्र होकर फ़ैल चुका है /सरकार और पुलिस की ज्यादतिओं की विरोध में वामपंथी छात्र संगठन यू.सी.यू ., एन.यू.एस. सहित आठ छात्र संगठनों ने 13 दिसम्बर को शिक्षण - संस्थानों में नेशनल बंद का आह्वान किया है /दरअसल उदारीकरण में जनता को जीवन की बुनियादी सुविधाएं प्राथमिक चिकित्सा, भोजन ,शिक्षा,आवास, पेयजलआदि तक नहीं है , जिसके कारण सामजिक बेचैनी बढ़ रही है/इधर भारत में भी एक जमाना था अब शिक्षण -संस्थानों को शिक्षक , डॉक्टर , वकील, बुद्धिजीवी आदि चलाते थे पर अब इनपर राजनेताओं , भूमाफियाओं और धन्नासेठों का कब्ज़ा है  /  केंद्र और राज्य सरकारें वर्ल्ड बैंक के दबाव में अपनी शिक्षा नीतियां बना रही हैं जिससे निजी शिक्षण संस्थान कुकरमतों की तरह गली गली में खुल रहे हैं और अब निजी और विदेशी विश्वविद्यालयों की भी बाड़ आने वाली है. घोटालों में लिप्त यू.पी.ए. -2  ने शिक्षा में अघोषित आपातकाल लागू  कर दिया है और उसे 25 करोड़ बेरोजगारों की कोई चिंता नहीं है , बढ़ती बेरोजगारी से युवाओं में भारी निराशा और बेचैनी है/यद्धपि भारत में जनसाधारण और युवाओं के आक्रोश ने संगठित आन्दोलन का रूप नहीं लिया है और उसकी स्पष्ट दिशा भी तय नहीं हुई है/लेकिन केंद्र सरकार को  बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा के बाजारीकरण के विरुद्ध अपनी नीतियों को बदलना होगा , वर्ना वो दिन दूर नहीं जब भारत में भी विशाल युवा आन्दोलन पनप उठेगा /इंग्लैंड ,फ्रांस और इटली की घटनाएँ  आकस्मिक घटनाएँ नहीं हैं , बल्कि यह  भूमंडलीकरण के विरुद्ध युवाओं की बगावत है जो इंग्लैंड तक रुकने वाली नहीं हैं/ शायद वैश्विक युवा आन्दोलन उदारीकरण के विरुद्ध संघर्ष में नया इतिहास रचेगा ! !!    !!!   ............                                                                         























                             

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